25.4.20

योगेन्द्र जाट की कविता - '' भारत की चीख़ ''












भारत की चीख ..

आजाद हिन्द के ख्वावो का .
मैं सुनहरा  महल बनाऊगाँ .
तुम अपनी - अपनी रजा पढो.
मैं गीत बहार के लाऊगा..

तुम मंजिल अपनी चमकाओ .
क्यों  डरे हुए हो धुन्द तले..
क्या भूल गए तुम इस भारत को 
ज़हा मुंड कटे और रूंड लडे.
बनाने दुल्हन आजादी को..
ज़हाँ  भगत सिंह से सिंह  खडे .
तुम एक वार  पहल करो..
मैं तारे भी झुकवाऊगा..

उन दरबारों के कानों  में ..
चीखें  जब सुन जायेगी..
निर्भया अंजना भवॅरी सोम्या .
ये फिर ना दोहराई जायेगी..
ऐसा मुमकिन तब हो जब हर नारी 
लक्ष्मी बाई बन जायेगी..
तुम कर्ज धरती का अदा करो.
मैं सूद  समेत लौटाऊँगा ...

                         - योगेन्द्र जाट  
                            जवाहर नवोदय विद्यालय ,
                           जाट बड़ोदा , जिला - सवाई माधोपुर ,
                            राजस्थान .

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