27.4.20

संगीत कुमार वर्णबाल - '' मन बाहर न चल ''














मन बाहर न चल
हे मन चौखट से बाहर न चल।
बाहर मौत व्याप्त है।।
अंगार धधक रहा, पैर बाहर न कर।
काल के मुँह में जाने की जरुरत न समझ।।
हे मन चौखट से बाहर न चल।
बाहर प्रवात दर्दनाक है।
दर्द लेने की जरूरत न समझ।।
जीवन अनमोल है।
श्मशान सजाने की जरूरत न कर।।
हे मन चौखट से बाहर न चल।
मन चंचल करने की जरूरत न कर।
सड़क पर टहलने की जरूरत न समझ।।
दूसरे को दिखाने की कोशिश न कर।
मृत्यु से हाथ मिलाने की जरूरत न समझ।।
हे मन चौखट से बाहर न चल।
बाहर काल मँडरा रहा है।
इसे छूने की कोशिश न कर।।
दिल पसीज जायेगा।
संसार बिखर जायेगा।।
हे मन चौखट से बाहर न चल। **
               - संगीत कुमार 
                                    जबलपुर 
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संगीत कुमार वन बाल

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संकलन - सुनील कुमार शर्मा, पी.जी.टी.(इतिहास),जवाहर नवोदय विद्यालय,जाट बड़ोदा,जिलासवाई माधोपुर  ( राजस्थान ),फोन नम्बर– 09414771867





          

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